क्या आपने कभी सुना है ऐसी झील के बारे में, जहां पानी के नीचे नहीं, बल्कि किनारे पर बिखरे हों सैकड़ों कंकाल?
उत्तराखंड की बर्फ से ढकी Roopkund झील में 500 से भी ज़्यादा मानव कंकाल पाए गए हैं। वैज्ञानिक भी हैरान हैं कि ये सभी वहां कैसे पहुंचे?
सभी कंकालों के सिर पर गोल चोट के निशान मिले हैं। क्या हुआ था ऐसा जिससे सभी एक ही तरह मरे?
DNA टेस्ट और रेडियोकार्बन डेटिंग से पता चला कि कंकाल दो अलग-अलग समय की घटनाओं से जुड़े हैं – एक 9वीं सदी और दूसरी 19वीं सदी से।
एक थ्योरी कहती है कि भारी ओलों की बारिश हुई थी, जिससे लोग बच नहीं पाए। तेज़ बर्फीले तूफान में सबकी जान चली गई।
DNA रिपोर्ट्स बताती हैं कि कुछ लोग भारतीय थे, जबकि कुछ शायद यूनानी या मध्य एशियाई मूल के थे। इतने दूर के लोग वहां क्या कर रहे थे?
स्थानीय लोग मानते हैं कि एक रानी ने देवी नंदा का अपमान किया था, जिससे देवी ने पूरा दल खत्म कर दिया।
आज Roopkund ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए एक रोमांचक और खतरनाक जगह बन चुकी है। हर साल सैकड़ों लोग वहां पहुंचते हैं।
इतने शोध, रिपोर्ट्स और मान्यताओं के बावजूद Roopkund की सच्चाई आज भी पूरी तरह उजागर नहीं हो पाई है।
क्या आप ऐसी जगह जाना चाहेंगे जहां हवा में आज भी बिखरे हैं इतिहास के अनसुलझे टुकड़े?