Income Tax: नया साल आते ही हर नौकरीपेशा व्यक्ति के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इस बार टैक्स कैसे बचेगा। सैलरी बढ़ने की खुशी अक्सर इनकम टैक्स की टेंशन के साथ जुड़ी होती है।
2026 की शुरुआत के साथ ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नए ITR फॉर्म्स लाने की तैयारी में है और इसी बीच टैक्स को लेकर कुछ राहत भरी बातें भी सामने आई हैं। अगर आपकी सालाना सैलरी ₹15 लाख के आसपास है, तो सही प्लानिंग के जरिए इसे काफी हद तक या लगभग टैक्स-फ्री बनाया जा सकता है।
इसमें सबसे बड़ा रोल निभाते हैं EPF और NPS जैसे लॉन्ग-टर्म सेविंग ऑप्शंस, जो न सिर्फ टैक्स बचाते हैं बल्कि भविष्य को भी सुरक्षित करते हैं।
आज के समय में टैक्स बचाना सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि समझदारी भरा फैसला बन चुका है। सही जानकारी और सही कदम आपको बेवजह टैक्स देने से बचा सकते हैं।
नया Income Tax रिजीम 2026 क्या कहता है
2026 में नया टैक्स रिजीम ज्यादा सरल और पारदर्शी माना जा रहा है। इस रिजीम के तहत अगर आपकी सालाना आय ₹12 लाख तक है, तो आपको कोई इनकम टैक्स नहीं देना होता। इसके अलावा सरकार ने स्टैंडर्ड डिडक्शन की सुविधा भी दी है, जिससे टैक्सेबल इनकम और कम हो जाती है।

Income Taxएक्ट की धारा 115BAC(1A)(iii) के तहत ₹75,000 तक की स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलता है। इसका मतलब यह है कि ₹12.75 लाख तक की आय पर टैक्स का बोझ काफी हद तक हल्का हो जाता है। यहीं से टैक्स प्लानिंग की असली कहानी शुरू होती है, क्योंकि सही निवेश आपको इस सीमा से भी आगे राहत दिला सकता है।
EPF से टैक्स कैसे बचेगा
कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF हर सैलरीड व्यक्ति के लिए सबसे भरोसेमंद सेविंग स्कीम मानी जाती है। EPF में किया गया योगदान आपकी टैक्सेबल इनकम से सीधे घट जाता है। इसका फायदा यह होता है कि आपकी सैलरी कागजों में कम दिखाई देती है और टैक्स भी उसी हिसाब से लगता है। EPF न सिर्फ टैक्स बचाता है बल्कि रिटायरमेंट के बाद एक मजबूत फाइनेंशियल सपोर्ट भी देता है।
अगर आप हर महीने नियमित रूप से EPF में योगदान करते हैं, तो साल के अंत तक यह एक अच्छी खासी रकम बन जाती है, जो टैक्स से राहत दिलाने में मदद करती है।
NPS से ₹15 लाख तक टैक्स बचाने का रास्ता
नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS उन लोगों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है, जो टैक्स बचाने के साथ-साथ रिटायरमेंट प्लानिंग भी करना चाहते हैं। NPS में निवेश करने पर अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है, जो EPF के अलावा होती है। यही वजह है कि EPF और NPS को मिलाकर टैक्स प्लानिंग करने से आपकी टैक्सेबल इनकम काफी नीचे आ सकती है।
अगर कोई व्यक्ति सही तरीके से EPF और NPS दोनों में निवेश करता है, तो उसकी सालाना सैलरी ₹14.66 लाख तक लगभग टैक्स-फ्री हो सकती है। यही कारण है कि फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स NPS को टैक्स सेविंग का मजबूत हथियार मानते हैं।
₹15 लाख की सैलरी पर टैक्स-फ्री का गणित
जब आपकी सैलरी ₹15 लाख के करीब होती है, तब सामान्य तौर पर टैक्स देना जरूरी माना जाता है। लेकिन स्टैंडर्ड डिडक्शन, EPF और NPS के योगदान को जोड़ दिया जाए, तो टैक्सेबल इनकम काफी कम हो जाती है। यही स्मार्ट टैक्स प्लानिंग आपको अतिरिक्त टैक्स से बचाती है और आपकी मेहनत की कमाई आपके पास रहती है।
यह तरीका खास तौर पर मिडिल क्लास और अपर मिडिल क्लास सैलरीड लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।
क्यों जरूरी है समय पर Income Tax प्लानिंग

अक्सर लोग साल के आखिर में टैक्स बचाने की सोचते हैं, जिससे कई मौके हाथ से निकल जाते हैं। अगर आप साल की शुरुआत से ही EPF और NPS जैसी स्कीम्स में निवेश करें, तो टैक्स का बोझ अपने आप कम होता चला जाता है। इससे न सिर्फ टैक्स बचता है, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा भी मजबूत होती है।
ओवरव्यू: Income Tax बचाने का आसान सार
| पहलू | जानकारी |
|---|---|
| टैक्स रिजीम | नया टैक्स रिजीम 2026 |
| टैक्स-फ्री आय | ₹12 लाख तक |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | ₹75,000 |
| टैक्स सेविंग टूल | EPF और NPS |
| संभावित टैक्स-फ्री सैलरी | ₹14.66 लाख तक |
FAQs
1. क्या ₹15 लाख की सैलरी पूरी तरह टैक्स-फ्री हो सकती है?
पूरी तरह नहीं, लेकिन EPF और NPS के सही इस्तेमाल से टैक्स काफी हद तक कम किया जा सकता है।
2. नया टैक्स रिजीम किसके लिए बेहतर है?
जो लोग सरल टैक्स स्ट्रक्चर चाहते हैं और सीमित निवेश करते हैं, उनके लिए नया टैक्स रिजीम बेहतर माना जाता है।
3. EPF और NPS दोनों में निवेश जरूरी है क्या?
जरूरी नहीं, लेकिन दोनों में निवेश करने से टैक्स बचत का फायदा ज्यादा मिलता है।
4. स्टैंडर्ड डिडक्शन किसे मिलती है?
यह सैलरीड और पेंशन पाने वाले व्यक्तियों को मिलती है।
5. क्या टैक्स नियम हर साल बदलते हैं?
हां, सरकार समय-समय पर टैक्स नियमों में बदलाव करती रहती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। टैक्स नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। किसी भी निवेश या टैक्स प्लानिंग से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट या फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।
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