Revised ITR: जब साल के आखिरी दिन नज़दीक आते हैं, तो बहुत से टैक्सपेयर्स के मन में एक ही सवाल घूमने लगता है कि अगर ITR भरते समय कोई गलती हो गई हो, तो अब क्या किया जाए। किसी ने आय कम दिखा दी, किसी से कोई डिडक्शन छूट गई, तो किसी को बाद में गलती का एहसास हुआ।
ऐसे ही पलों में Revised ITR और Updated ITR का विकल्प सामने आता है। सुनने में दोनों एक जैसे लगते हैं, लेकिन असल में इनके नियम, उद्देश्य और असर बिल्कुल अलग हैं।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए ये दोनों विकल्प दिए हैं, ताकि ईमानदारी से अपनी गलती सुधारी जा सके। लेकिन सही विकल्प चुनना बहुत जरूरी है, क्योंकि गलत चुनाव भविष्य में परेशानी भी खड़ी कर सकता है।
Revised ITR क्या होता है और कब जरूरी होता है
Revised ITR उन टैक्सपेयर्स के लिए है, जिन्होंने समय पर रिटर्न फाइल तो कर दिया, लेकिन बाद में महसूस हुआ कि उसमें कोई गलती रह गई है। यह गलती इनकम की गणना में हो सकती है, बैंक इंटरेस्ट छूट सकता है या फिर किसी सेक्शन का डिडक्शन गलत डाल दिया गया हो। इनकम टैक्स कानून आपको मौका देता है कि आप अपनी पहले से फाइल की गई ITR को 31 दिसंबर 2025 तक संशोधित कर सकें।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें कोई अतिरिक्त पेनल्टी नहीं लगती, बशर्ते गलती जानबूझकर न की गई हो। अगर आपने ज्यादा टैक्स भर दिया है, तो Revised ITR के जरिए रिफंड भी क्लेम किया जा सकता है। इसलिए यह विकल्प उन लोगों के लिए राहत भरा है, जो समय रहते अपनी भूल सुधारना चाहते हैं।
Updated ITR क्या है और क्यों लाया गया
Updated ITR उन लोगों के लिए लाया गया है, जिन्होंने या तो ITR फाइल ही नहीं की या फिर जानबूझकर या अनजाने में कुछ आय छुपा ली। सरकार का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाना है और लोगों को खुद आगे आकर अपनी गलती सुधारने का मौका देना है।
Updated ITR में टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त टैक्स के साथ एक तय पेनल्टी भी देनी होती है। यह पेनल्टी इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी देरी से ITR अपडेट कर रहे हैं। हालांकि इसमें रिफंड क्लेम की अनुमति नहीं होती। यह विकल्प उन लोगों के लिए है जो भविष्य में किसी नोटिस या जांच से बचना चाहते हैं और साफ-सुथरा रिकॉर्ड बनाए रखना चाहते हैं।
Revised और Updated ITR में सही चुनाव क्यों जरूरी है
बहुत से टैक्सपेयर्स जल्दबाज़ी में Updated ITR भर देते हैं, जबकि उनका काम Revised ITR से भी हो सकता था। इससे उन्हें बेवजह अतिरिक्त टैक्स और पेनल्टी चुकानी पड़ती है। अगर आपकी गलती छोटी है और आपने पहले से रिटर्न फाइल कर रखा है, तो Revised ITR सबसे सुरक्षित और किफायती रास्ता है।
वहीं अगर कोई आय पूरी तरह छूट गई है और टैक्स डिपार्टमेंट के पास पहले से उसका डेटा मौजूद है, तो Updated ITR फाइल करना बेहतर होता है। इससे आप भविष्य की कानूनी परेशानियों से बच सकते हैं और टैक्स रिकॉर्ड को सही कर सकते हैं।
टैक्सपेयर्स के लिए भावनात्मक लेकिन जरूरी सलाह

टैक्स भरना सिर्फ कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन का हिस्सा है। गलती इंसान से ही होती है, लेकिन समय रहते उसे स्वीकार कर सुधार लेना समझदारी है। Revised और Updated ITR दोनों का मकसद सजा देना नहीं, बल्कि सिस्टम को साफ और भरोसेमंद बनाना है। सही जानकारी के साथ लिया गया फैसला न सिर्फ पैसा बचा सकता है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम करता है।
Overview
| पहलू | Revised ITR | Updated ITR |
|---|---|---|
| फाइल करने की समय सीमा | 31 दिसंबर 2025 | संबंधित असेसमेंट ईयर के 2 साल के भीतर |
| उद्देश्य | पहले से फाइल ITR की गलती सुधारना | छूटी हुई आय को बाद में घोषित करना |
| अतिरिक्त टैक्स | सामान्य टैक्स नियम | अतिरिक्त टैक्स और पेनल्टी |
| रिफंड क्लेम | संभव | रिफंड क्लेम नहीं |
| किसके लिए बेहतर | छोटी और ईमानदार गलतियों के लिए | बड़ी आय छूटने की स्थिति में |
FAQs
1. Revised ITR फाइल करने की आखिरी तारीख क्या है
Revised ITR फाइल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 है।
2. क्या Updated ITR में रिफंड मिल सकता है
नहीं, Updated ITR में रिफंड क्लेम करने की अनुमति नहीं होती।
3. अगर गलती छोटी हो तो कौन सा विकल्प चुनें
छोटी और अनजानी गलती के लिए Revised ITR सबसे सही विकल्प है।
4. Updated ITR में पेनल्टी क्यों लगती है
क्योंकि यह छूटी हुई आय को बाद में घोषित करने का मौका देता है।
5. क्या Revised ITR बार-बार फाइल की जा सकती है
हां, समय सीमा के भीतर जरूरत पड़ने पर एक से ज्यादा बार फाइल की जा सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। टैक्स से जुड़े नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। किसी भी निर्णय से पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की आधिकारिक वेबसाइट या योग्य टैक्स सलाहकार से सलाह अवश्य लें।
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