Pausha Putrada Ekadashi: अगर आप मन से किसी इच्छा को पूरा करने की चाह रखते हैं, खासकर संतान सुख या परिवार की खुशहाली से जुड़ी कामना, तो पौष पुत्रदा एकादशी का दिन बेहद शुभ माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की कृपा प्राप्त करने का अवसर देता है। इस पवित्र दिन पर शिवलिंग पर विशेष पूजन करने से मन की हर चाह धीरे-धीरे पूरी होने लगती है।
लोग अक्सर यह सवाल पूछते हैं कि इस दिन शिवलिंग पर क्या चढ़ाया जाए जिससे पूजा फलदायी हो। आज हम उसी सरल और पवित्र विधि को दिल से समझने की कोशिश करेंगे, ताकि आपका व्रत और पूजा दोनों सफल हों।
पौष पुत्रदा एकादशी का महत्व और आस्था

पौष मास में आने वाली यह एकादशी अपने आप में अत्यंत शुभ होती है। माना जाता है कि इस व्रत को रखने से संतान संबंधी चिंताएँ दूर होती हैं, परिवार में सुख-शांति आती है और मन धीरे-धीरे हल्का महसूस करता है। कई लोग इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, लेकिन शिवलिंग पर पूजा करना भी बेहद प्रभावकारी माना गया है।
यह दिन सिर्फ इच्छाएँ मांगने का नहीं, बल्कि मन को शांत करने और सकारात्मकता को भीतर उतारने का होता है। जो लोग सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं, उन्हें शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं: क्या माना जाता है शुभ?
इस दिन शिवलिंग पर कुछ विशेष वस्तुएं चढ़ाने से आशीर्वाद जल्दी प्राप्त होता है। पूजा का तरीका बहुत कठिन नहीं है। बस मन साफ रखें, भावनाएं सच्ची हों, और श्रद्धा के साथ पूजा करें।
शिवलिंग पर जल अर्पित करना सबसे जरूरी माना गया है। इसके बाद कच्चा दूध, शहद या गंगाजल चढ़ाना शुभ होता है। बिल्वपत्र चढ़ाकर अपनी इच्छा मन में ही कहें, क्योंकि माना जाता है कि भगवान महादेव बिना बोले भी भक्तों का मन समझ लेते हैं।
अगर घर में शांति, संतान सुख या सेहत की समस्या हो, तो सफेद फूल चढ़ाना बेहद लाभकारी है। वहीं, गुड़ और अक्षत चढ़ाने से आर्थिक स्थिरता में भी मदद मिलती है।
पौष पुत्रदा एकादशी व्रत और पूजा विधि
सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद बिल्वपत्र, धूप और दीप लगाएं। “ऊँ नमः शिवाय” का जप करते हुए कुछ क्षण शांत बैठना मन को स्थिर करता है।
व्रत रखने वाले लोग दिन भर फलाहार और सरल भोजन लेते हैं। शाम को फिर से पूजा करके व्रत पूरा किया जाता है। यह प्रक्रिया मन और शरीर दोनों को हल्का बनाने में मदद करती है।
पौष पुत्रदा एकादशी के लाभ

इस दिन व्रत और पूजा करने से परिवार में खुशहाली बढ़ती है। मन में जमा नकारात्मकता खत्म होती है और व्यक्ति अंदर से मजबूत महसूस करता है। जिन दंपतियों को संतान की इच्छा होती है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है।
भगवान शिव और विष्णु दोनों की कृपा मिलने से जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा आती है। कई लोग बताते हैं कि इस दिन की पूजा के बाद जीवन में नई शुरुआत का मार्ग खुलता है।
Overview Table: Paush Putrada Ekadashi 2025
| फीचर | जानकारी |
|---|---|
| एकादशी का महत्व | संतान सुख, परिवार की खुशहाली, मानसिक शांति |
| किसकी पूजा | भगवान विष्णु और शिव |
| शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं | जल, दूध, बिल्वपत्र, सफेद फूल, शहद |
| पूजा का समय | सुबह ब्रह्म मुहूर्त और शाम |
| मुख्य लाभ | मानसिक शांति, संतान सुख, घर में सकारात्मकता |
| उपवास नियम | फलाहार और सात्विक भोजन |
| विशेष मंत्र | ऊँ नमः शिवाय |
FAQs: Paush Putrada Ekadashi
Q1. पौष पुत्रदा एकादशी पर शिवलिंग पर क्या चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है?
शिवलिंग पर जल, दूध और बिल्वपत्र चढ़ाना इस दिन अत्यंत शुभ है।
Q2. क्या यह व्रत संतान सुख के लिए रखा जाता है?
हाँ, यह व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए बेहद शुभ माना गया है।
Q3. इस दिन व्रत कैसे रखा जाता है?
सात्विक भोजन, जल अर्पण, मंत्र जाप और शाम की पूजा के साथ यह व्रत पूरा किया जाता है।
Q4. क्या महिलाएं भी यह व्रत रख सकती हैं?
जी हाँ, महिलाएं भी श्रद्धा के साथ यह व्रत रख सकती हैं।
Q5. क्या शिवलिंग पर चढ़ाया दूध घर में इस्तेमाल हो सकता है?
नहीं, पूजा का दूध कभी दोबारा उपयोग नहीं किया जाता।
Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। वास्तविक विधि क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकती है। किसी भी महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य से पहले अपने पारिवारिक पंडित या स्थानीय मंदिर से सलाह अवश्य लें।

















