Shami Kabab: दिल्ली की गलियों में शाम ढलते ही एक खास खुशबू हर किसी को अपनी ओर खींचती है। चाहे किसी की शानदार पार्टी हो या घर की साधारण दावत, एक प्लेट में सजे फ्लैट, मुलायम और सुगंधित कबाब माहौल को और भी खास बना देते हैं। यह कबाब तंदूर में नहीं बनता, न ही इसमें तेल की छलक नजर आती है, फिर भी इसका हर एक कौर दिल को गर्माहट दे जाता है। यही है दिल्ली का मशहूर शामी कबाब एक ऐसा स्वाद, जो हर तबके, हर उम्र और हर दिल को जोड़ देता है।
Shami Kabab का असली जादू तवे पर

Shami Kabab की खासियत उसकी सादगी और उसके स्वाद की गहराई है। बारीक पीसा हुआ मांस, हल्की-सी हरी मिर्च, बारीक कटे प्याज़, अदरक-लहसुन की सौंधी खुशबू और गरम मसाले की नरम-सी गरमाहट—इन सबका मेल जब एक साथ आता है, तो ये मांस छोटे-छोटे, हथेली जितने गोले बनकर तवे पर सिकते हैं। सबसे रोचक बात यह है कि ये कबाब बिना तेल के पकाए जाते हैं, फिर भी बाहर से हल्के कुरकुरे और अंदर से बेहद नरम रहते हैं।
इसके साथ परोसी जाती है कच्चे प्याज़ की स्लाइस और उत्तरी भारत की पहचान—हरी चटनी। हरी मिर्च, धनिया और पुदीने से बनी यह चटनी ताजगी का ऐसा स्वाद देती है, जो कबाब के हर कौर को और भी यादगार बना देती है।
दिल्ली की दावतों में Shami Kabab की अलग पहचान
ग़लावटी, मलाई टिक्का या अन्य शानदार कबाबों की भीड़ में शामी कबाब न तो बहुत सजधज वाला है, न ही भारी-भरकम। लेकिन वहीं इसकी असली खूबसूरती है सीधा-सादा, ईमानदार स्वाद। यही वजह है कि यह दिल्ली की हर दावत और पार्टी में हमेशा अपनी खास जगह बनाए रखता है।

एक बात ज़रूर याद रखी जानी चाहिए इसे “शाम्मी” नहीं, बल्कि सही उच्चारण “शामी” कहा जाता है। दिल्ली की शामों की हलचल, खुशबूदार हवा और एक गर्मागरम शामी कबाब इससे बेहतर साथ शायद ही कोई हो, जो मन को इतनी सहज खुशी दे सके।
Disclaimer: यह लेख भोजन संस्कृति और स्वाद के अनुभवों पर आधारित है। व्यंजन, उनकी विधि और उनका स्वाद स्थान, समय और व्यक्तिगत पसंद के अनुसार बदल सकते हैं। पाठकों से निवेदन है कि किसी भी खाद्य जानकारी को अपनी व्यक्तिगत आवश्यकता और विवेक के अनुसार अपनाएं।

















