US Stocks: आज के समय में कई भारतीय निवेशक पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS), ग्लोबल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और फिनटेक ऐप्स के माध्यम से सीधे अमेरिकी शेयरों में निवेश कर रहे हैं। लेकिन ज्यादातर लोग एक महत्वपूर्ण बात से अनजान हैं। अनुभवी निवेशक समीर अरोड़ा ने चेतावनी दी है कि जो भारतीय निवेशक सीधे यूएस स्टॉक्स के मालिक हैं, उनके लिए मृत्युपरांत 40% की एस्टेट टैक्स की संभावना है।
एस्टेट टैक्स क्या है और क्यों है खतरनाक

अमेरिका में एस्टेट टैक्स उन विदेशी निवेशकों पर लागू होता है जिनके यूएस-साइटस संपत्ति का मूल्य $60,000 से अधिक है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई भारतीय निवेशक $200,000 की अमेरिकी शेयर संपत्ति रखता है और मृत्यु हो जाती है, तो $60,000 के ऊपर की राशि पर 40% टैक्स लगेगा। इस हिसाब से $200,000 में से केवल $144,000 ही उत्तराधिकारियों को मिलेंगे। यह टैक्स प्रगतिशील है, यानी संपत्ति जितनी बड़ी होगी, टैक्स की दर उतनी अधिक होगी।
समीर अरोड़ा ने X पर लिखा, “आज हर कोई भारत में US Stocks में निवेश करना चाहता है। PMS के माध्यम से शेयरों को सीधे नाम पर रखने वाले निवेशकों को 40% एस्टेट टैक्स का खतरा है। निवेश करने से पहले अच्छी तरह जानकारी लें।”
जोखिम कम करने के वैकल्पिक उपाय
चूंकि भारत और अमेरिका के बीच कोई एस्टेट टैक्स संधि नहीं है, इसलिए निवेशक कुछ वैकल्पिक संरचनाओं के माध्यम से इस टैक्स से बच सकते हैं। विदेशी-आधारित फंड जैसे कि आयरलैंड या लक्ज़मबर्ग में स्थित म्यूचुअल फंड और ETFs के माध्यम से निवेश करना एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। इसके अलावा, IFSC पूल्ड फंड स्ट्रक्चर के तहत अमेरिकी शेयर रखने से निवेशक सीधे मालिक नहीं माने जाते और टैक्स का बोझ कम होता है।
कुछ उच्च निवल मूल्य (HNIs) और परिवारिक निवेशक कॉर्पोरेट या ट्रस्ट संरचनाओं का सहारा लेते हैं, जो कानूनी रूप से संपत्ति की मालिकाना स्थिति बदल देती हैं। इसके अलावा, जीवन बीमा पॉलिसी के माध्यम से भी अनुमानित एस्टेट टैक्स का भुगतान किया जा सकता है, जिससे उत्तराधिकारी को सुविधा मिलती है।
US Stocks: सावधानी रखें

US Stocks में निवेश करना आकर्षक हो सकता है, लेकिन निवेशक को छिपे हुए टैक्स और नियमों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। सही योजना और संरचना के माध्यम से निवेश सुरक्षित बनाया जा सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचना और मार्गदर्शन के लिए है। निवेश करने से पहले कृपया वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह लें।
